Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.3.39: लक्ष्मण के इन कुशल स्वीकृति-वचनों को सुनकर पवनपुत्र हनुमान अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने सुग्रीव की विजय पर ध्यान केन्द्रित किया तथा उस समय दोनों भाइयों से मित्रता करने की इच्छा व्यक्त की। | ramayan सर्ग 4.3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मण के इन कुशल स्वीकृति-वचनों को सुनकर पवनपुत्र हनुमान अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने सुग्रीव की विजय पर ध्यान केन्द्रित किया तथा उस समय दोनों भाइयों से मित्रता करने की इच्छा व्यक्त की।
Hearing these skillful words of acceptance from Lakshman, Hanuman, the son of the wind, the ape, was very pleased. He concentrated on Sugreeva's victory and desired to befriend both the brothers at that time.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे तृतीय: सर्ग: ॥ ३ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें तीसरा सर्ग पूरा हुआ ॥ ३ ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥