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ramayan 4.3.32: ‘ये संस्कार 1 और क्रम 2 पूर्ण, अद्भुत, तत्काल 3 हैं और हृदय को आनन्द देने वाले शुभ वचनों का उच्चारण करते हैं ॥32॥   |   ramayan सर्ग 4.3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.3.32 
संस्कारक्रमसम्पन्नामद्भुतामविलम्बिताम्।
उच्चारयति कल्याणीं वाचं हृदयहर्षिणीम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘ये संस्कार 1 और क्रम 2 पूर्ण, अद्भुत, तत्काल 3 हैं और हृदय को आनन्द देने वाले शुभ वचनों का उच्चारण करते हैं ॥32॥
 
‘These sanskars 1 and sequentially 2 are complete, wonderful, immediate 3 and pronounce auspicious words that give joy to the heart. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)