श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  4.3.19-20 
एवं मां परिभाषन्तं कस्माद् वै नाभिभाषत:॥ १९॥
सुग्रीवो नाम धर्मात्मा कश्चिद् वानरपुङ्गव:।
वीरो विनिकृतो भ्रात्रा जगद‍्भ्रमति दु:खित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वीरों! मैं तुमसे बार-बार तुम्हारा परिचय पूछ रहा हूँ, फिर भी तुम उत्तर क्यों नहीं दे रहे? यहाँ सुग्रीव नाम का एक महापुरुष वानर रहता है, जो बड़ा ही धर्मात्मा और वीर है। उसके भाई बाली ने उसे घर से निकाल दिया है; इसी कारण वह अत्यन्त दुःखी होकर संसार में भटक रहा है॥ 20॥
 
‘Heroes! I am asking you about your identity again and again, why are you not answering me? Here lives a great monkey named Sugreev, who is very pious and brave. His brother Vali has thrown him out of the house; that is why he is very sad and is wandering around the world.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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