श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  4.3.16-17h 
इमे च धनुषी चित्रे श्लक्ष्णे चित्रानुलेपने॥ १६॥
प्रकाशेते यथेन्द्रस्य वज्रे हेमविभूषिते।
 
 
अनुवाद
आपके ये दोनों धनुष विचित्र, चिकने और अद्भुत लेप से रंगे हुए हैं। ये सोने से अलंकृत हैं; अतः इन्द्र के वज्र के समान चमक रहे हैं॥16 1/2॥
 
‘These two bows of yours are strange, smooth and painted with a wonderful coating. They are decorated with gold; hence they are shining like the thunderbolt of Indra.॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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