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ramayan 4.29.9-10h: हे राजन! आपने राज्य और यश तो प्राप्त कर लिया है, तथा कुल परम्परा से प्राप्त धन भी बढ़ा लिया है; परंतु मित्र-ग्रहण का कार्य अभी शेष है, उसे अब पूरा कर लीजिए॥9 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  4.29.9-10h 
राज्यं प्राप्तं यशश्चैव कौली श्रीरभिवर्धिता॥ ९॥
मित्राणां संग्रह: शेषस्तद् भवान् कर्तुमर्हति।
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपने राज्य और यश तो प्राप्त कर लिया है, तथा कुल परम्परा से प्राप्त धन भी बढ़ा लिया है; परंतु मित्र-ग्रहण का कार्य अभी शेष है, उसे अब पूरा कर लीजिए॥9 1/2॥
 
O King! You have acquired the kingdom and fame and also increased the wealth that has come through the family tradition; but the task of accepting friends is still pending, you should complete it now.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)