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ramayan 4.29.33: यह मेरी निश्चित आज्ञा है। तदनुसार, इस व्यवस्था का भार संभालकर तुम स्वयं अंगद सहित वानरों के पास जाओ।’ ऐसी व्यवस्था करके महाबली वानरराज सुग्रीव अपने महल में चले गए।   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.29.33 
हरींश्च वृद्धानुपयातु साङ्गदो
भवान् ममाज्ञामधिकृत्य निश्चितम्।
इति व्यवस्थां हरिपुङ्गवेश्वरो
विधाय वेश्म प्रविवेश वीर्यवान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
यह मेरी निश्चित आज्ञा है। तदनुसार, इस व्यवस्था का भार संभालकर तुम स्वयं अंगद सहित वानरों के पास जाओ।’ ऐसी व्यवस्था करके महाबली वानरराज सुग्रीव अपने महल में चले गए।
 
This is my definite order. Accordingly, after taking charge of this arrangement, you yourself go to the elder monkeys along with Angad.' After making such arrangements, the mighty monkey king Sugreeva went to his palace.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकोनत्रिंश: सर्ग: ॥ २ ९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें उन्तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)