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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.29.27 
तदाज्ञापय क: किं ते कुतो वापि व्यवस्यतु।
हरयो ह्यप्रधृष्यास्ते सन्ति कोटॺग्रतोऽनघ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
"भोले वानरराज! अतः आप ही आदेश दें कि कौन कहाँ से काम करे और आपकी किस आज्ञा का पालन करे। आपके अधीन करोड़ों से भी अधिक वानर हैं, जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता।"
 
‘Innocent monkey king! So you order who should work from where to obey which of your orders. There are more than crores of monkeys under your command, whom no one can defeat.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)