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ramayan 4.29.26: हे कपीश्वर! यदि आपकी आज्ञा हो तो हमारी गति कहीं भी नहीं रुकेगी - जल में, स्थल पर, नीचे (पाताल में) या ऊपर आकाश में॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.29.26 
नाधस्तादवनौ नाप्सु गतिर्नोपरि चाम्बरे।
कस्यचित् सज्जतेऽस्माकं कपीश्वर तवाज्ञया॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे कपीश्वर! यदि आपकी आज्ञा हो तो हमारी गति कहीं भी नहीं रुकेगी - जल में, स्थल पर, नीचे (पाताल में) या ऊपर आकाश में॥ 26॥
 
O Kapishwar! If you permit, our movement will not be stopped anywhere - in water, on land, below (in the netherworld) or above in the sky.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)