श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.29.22 
कामं खलु शरै: शक्त: सुरासुरमहोरगान्।
वशे दाशरथि: कर्तुं त्वत्प्रतिज्ञामवेक्षते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि दशरथपुत्र भगवान राम अपने बाणों से समस्त देवताओं, दानवों तथा बड़े-बड़े सर्पों को भी परास्त कर सकते हैं। तथापि वे अपने कार्य को पूर्ण करने के लिए आपके द्वारा दिए गए वचन की प्रतीक्षा कर रहे हैं॥ 22॥
 
There is no doubt that Lord Rama, the son of Dasaratha, can subdue all the gods, demons and even the biggest serpents with his arrows. However, he is waiting for the promise you made to him to accomplish his task.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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