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यो हि कालव्यतीतेषु मित्रकार्येषु वर्तते।
स कृत्वा महतोऽप्यर्थान्न मित्रार्थेन युज्यते॥ १४॥
अनुवाद
जो मनुष्य मित्र के कार्य में उपयुक्त समय बीत जाने पर भी लग जाता है, वह अपने मित्र के उद्देश्य को पूरा नहीं मानता, चाहे वह बड़े से बड़ा कार्य ही क्यों न कर ले ॥14॥
He who engages himself in a friend's work after the opportune moment for the same has passed, is not considered to have accomplished the purpose of his friend even if he accomplishes the greatest of tasks.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥