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श्लोक  4.29.12 
तद् भवान् वृत्तसम्पन्न: स्थित: पथि निरत्यये।
मित्रार्थमभिनीतार्थं यथावत् कर्तुमर्हति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
आप सदाचारी हैं और सदैव सनातन धर्म के मार्ग पर चलने वाले हैं; अतः आपको अपने मित्र के कार्य को सफल बनाने के लिए जो वचन दिया है, उसे उचित रीति से पूरा करना चाहिए।
 
You are endowed with good conduct and are always on the path of eternal Dharma; therefore, you should fulfil the promise you have made to make your friend's work successful, in a proper manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)