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ramayan 4.29.11: हे पृथ्वीपति! जिस राजा के कोष, सेना, मित्र और शरीर, ये सब समान रूप से उसके अधीन रहते हैं, वह विशाल राज्य का पालन और उपभोग करता है॥ 11॥   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.29.11 
यस्य कोशश्च दण्डश्च मित्राण्यात्मा च भूमिप।
समान्येतानि सर्वाणि स राज्यं महदश्नुते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वीपति! जिस राजा के कोष, सेना, मित्र और शरीर, ये सब समान रूप से उसके अधीन रहते हैं, वह विशाल राज्य का पालन और उपभोग करता है॥ 11॥
 
Lord of the Earth! The king whose treasury, army, friends and body are all equally under his control, he maintains and enjoys a large kingdom.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)