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ramayan 4.29.10-11h: जो राजा अपने मित्रों के प्रति सदा सद्गुणों का व्यवहार करता है, उसका राज्य, यश और कीर्ति बढ़ती है।   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.29.10-11h 
यो हि मित्रेषु कालज्ञ: सततं साधु वर्तते॥ १०॥
तस्य राज्यं च कीर्तिश्च प्रतापश्चापि वर्धते।
 
 
अनुवाद
जो राजा अपने मित्रों के प्रति सदा सद्गुणों का व्यवहार करता है, उसका राज्य, यश और कीर्ति बढ़ती है।
 
The king who, knowing when to reciprocate, always behaves virtuously towards his friends, his kingdom, fame and glory increase.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)