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ramayan 4.28.66: हे मनुष्यों के स्वामी! जैसा आपने कहा है, वानरराज सुग्रीव शीघ्र ही आपकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करेंगे। अतः शत्रुओं का वध करने का दृढ़ निश्चय करके आप शरद ऋतु की प्रतीक्षा करें और इस वर्षा ऋतु के विलम्ब को सहन करें।'   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  4.28.66 
यदुक्तमेतत् तव सर्वमीप्सितं
नरेन्द्र कर्ता नचिराद्धरीश्वर:।
शरत्प्रतीक्ष: क्षमतामिमं भवान्
जलप्रपातं रिपुनिग्रहे धृत:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जैसा आपने कहा है, वानरराज सुग्रीव शीघ्र ही आपकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करेंगे। अतः शत्रुओं का वध करने का दृढ़ निश्चय करके आप शरद ऋतु की प्रतीक्षा करें और इस वर्षा ऋतु के विलम्ब को सहन करें।'
 
O Lord of men! As you have said, the monkey king Sugreeva will soon fulfill all your wishes. Therefore, with a firm resolve to kill the enemy, you should wait for the autumn season and bear the delay of this rainy season.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आ दिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डेऽष्टाविंश: सर्ग: ॥ २ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें अट्ठाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)