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ramayan 4.28.61: वानर सुग्रीव बहुत दिनों से दुःख भोग रहा था और बहुत दिनों के बाद अब उसे अपनी पत्नी मिली है। मेरे यहाँ एक बहुत कठिन कार्य है (जो कुछ दिनों में पूरा होने वाला नहीं है); इसलिए मैं इस समय उससे कुछ नहीं कहना चाहता।   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  4.28.61 
अपि चापि परिक्लिष्टं चिराद् दारै: समागतम्।
आत्मकार्यगरीयस्त्वाद् वक्तुं नेच्छामि वानरम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
वानर सुग्रीव बहुत दिनों से दुःख भोग रहा था और बहुत दिनों के बाद अब उसे अपनी पत्नी मिली है। मेरे यहाँ एक बहुत कठिन कार्य है (जो कुछ दिनों में पूरा होने वाला नहीं है); इसलिए मैं इस समय उससे कुछ नहीं कहना चाहता।
 
The monkey Sugreeva had been suffering for a long time and after a long time he has now met his wife. I have a very difficult task here (it is not going to be completed in a few days); therefore I do not want to say anything to him at this time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)