Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.28.6: मंद वायु आह के समान प्रतीत होती है, संध्या की लालिमा लाल चंदन बनकर माथे और शरीर के अन्य भागों को रंग रही है, मेघ के समान कपोल कुछ पीले रंग के प्रतीत हो रहे हैं। इस प्रकार आकाश कामातुर पुरुष के समान प्रतीत होता है॥6॥ | ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मंद वायु आह के समान प्रतीत होती है, संध्या की लालिमा लाल चंदन बनकर माथे और शरीर के अन्य भागों को रंग रही है, मेघ के समान कपोल कुछ पीले रंग के प्रतीत हो रहे हैं। इस प्रकार आकाश कामातुर पुरुष के समान प्रतीत होता है॥6॥
‘The soft breeze appears like a sigh, the redness of the evening is turning into red sandalwood and colouring the forehead and other parts of the body, and the cloud-like cheeks appear somewhat pale in colour. In this way the sky appears like a man in passion.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥