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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.28.52 
विलीयमानैर्विहगैर्निमीलद्भिश्च पङ्कजै:।
विकसन्त्या च मालत्या गतोऽस्तं ज्ञायते रवि:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
पक्षी अपने घोंसलों में दुबक गए हैं, कमल सिकुड़ रहे हैं और चमेली खिलने लगी है; ऐसा लगता है कि सूर्य अस्त हो गया है।
 
The birds are hiding in their nests, the lotuses are shrinking and the jasmine has begun to bloom; it seems that the Sun has set.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)