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ramayan 4.28.45: बहुत तेज़ बारिश हो रही है, हवा बहुत तेज़ चल रही है और नदियाँ अपने किनारों को तोड़कर बहुत तेज़ी से बह रही हैं। उन्होंने सड़कें जाम कर दी हैं।   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.28.45 
वर्षप्रवेगा विपुला: पतन्ति
प्रवान्ति वाता: समुदीर्णवेगा:।
प्रणष्टकूला: प्रवहन्ति शीघ्रं
नद्यो जलं विप्रतिपन्नमार्गा:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
बहुत तेज़ बारिश हो रही है, हवा बहुत तेज़ चल रही है और नदियाँ अपने किनारों को तोड़कर बहुत तेज़ी से बह रही हैं। उन्होंने सड़कें जाम कर दी हैं।
 
‘It is raining very heavily, the wind is blowing very strongly and the rivers are breaking their banks and flowing very fast. They have blocked the roads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)