Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.28.42: मीठे जल के प्रवाह से नष्ट हुए केसरयुक्त कमलपुष्पों को शीघ्रतापूर्वक त्यागकर, मधुमक्खियों के समूह, केसरयुक्त नए कदम्ब पुष्पों का रस सुखपूर्वक पान कर रहे हैं॥ 42॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.28.42 
नवाम्बुधाराहतकेसराणि
द्रुतं परित्यज्य सरोरुहाणि।
कदम्बपुष्पाणि सकेसराणि
नवानि हृष्टा भ्रमरा: पिबन्ति॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
मीठे जल के प्रवाह से नष्ट हुए केसरयुक्त कमलपुष्पों को शीघ्रतापूर्वक त्यागकर, मधुमक्खियों के समूह, केसरयुक्त नए कदम्ब पुष्पों का रस सुखपूर्वक पान कर रहे हैं॥ 42॥
 
The flocks of bees, having quickly abandoned the saffron-bearing lotus flowers destroyed by the flow of fresh water, are happily drinking the nectar of the new saffron-adorned kadamba flowers.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)