Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.28.37: विशाल पंखोंरूपी आभूषणों से विभूषित मोर वनों में कहीं नाच रहे हैं, कहीं ऊँची आवाज में मधुर वाणी बोल रहे हैं और कहीं वृक्षों की शाखाओं पर अपने सम्पूर्ण शरीर का भार डाले बैठे हैं। इस प्रकार उन्होंने संगीतमय कार्यक्रम (नृत्य-गायन) का आयोजन किया है॥37॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.28.37 
क्वचित् प्रनृत्तै: क्वचिदुन्नदद्भि:
क्वचिच्च वृक्षाग्रनिषण्णकायै:।
व्यालम्बबर्हाभरणैर्मयूरै-
र्वनेषु संगीतमिव प्रवृत्तम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
विशाल पंखोंरूपी आभूषणों से विभूषित मोर वनों में कहीं नाच रहे हैं, कहीं ऊँची आवाज में मधुर वाणी बोल रहे हैं और कहीं वृक्षों की शाखाओं पर अपने सम्पूर्ण शरीर का भार डाले बैठे हैं। इस प्रकार उन्होंने संगीतमय कार्यक्रम (नृत्य-गायन) का आयोजन किया है॥37॥
 
‘The peacocks, adorned with ornaments in the form of huge feathers, are dancing in some places in the forests, somewhere they are speaking sweetly in loud voices and somewhere they are sitting on the branches of the trees with the weight of their whole bodies. In this way they have organized a musical event (dance and singing).॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)