Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.28.36: भ्रमर-सी वीणा की मधुर झंकार सुनाई दे रही है। मेंढकों की ध्वनि कंठ-संगीत के समान प्रतीत हो रही है। बादलों की गर्जना के समान ढोल बज रहे हैं। इस प्रकार ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो वनों में संगीत-महोत्सव का आरम्भ हो रहा है। | ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भ्रमर-सी वीणा की मधुर झंकार सुनाई दे रही है। मेंढकों की ध्वनि कंठ-संगीत के समान प्रतीत हो रही है। बादलों की गर्जना के समान ढोल बज रहे हैं। इस प्रकार ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो वनों में संगीत-महोत्सव का आरम्भ हो रहा है।
‘The sweet tinkling of the bhramaar-like Veena is being heard. The sound of the frogs seems like a throat-melody. The drums are being played as the roar of the clouds. In this way, it seems as if a musical festival is being started in the forests.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥