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ramayan 4.28.3: ‘यह आकाशरूपी युवती सूर्य की किरणों के द्वारा समुद्रों का रस पीकर गर्भरूपी जलरूपी रसायन को जन्म दे रही है, जिसे वह कार्तिक आदि नौ महीनों तक धारण करती है॥3॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.28.3 
नवमासधृतं गर्भं भास्करस्य गभस्तिभि:।
पीत्वा रसं समुद्राणां द्यौ: प्रसूते रसायनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘यह आकाशरूपी युवती सूर्य की किरणों के द्वारा समुद्रों का रस पीकर गर्भरूपी जलरूपी रसायन को जन्म दे रही है, जिसे वह कार्तिक आदि नौ महीनों तक धारण करती है॥3॥
 
‘This sky-like young woman, drinking the juice of the oceans through the rays of the sun, is giving birth to the water-like chemicals in the form of a womb which she holds for the nine months of Kartik etc. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)