Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.28.25: इस चतुर्मास के प्रारम्भ में भगवान केशव के पास धीरे-धीरे निद्रा आ रही है। नदी वेगपूर्वक समुद्र की ओर आ रही है। हर्षित पक्षी बादलों की ओर उड़ रहा है और प्रियतम कामनापूर्वक अपने प्रियतम की सेवा के लिए प्रस्तुत हो रहा है॥ 25॥ | ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस चतुर्मास के प्रारम्भ में भगवान केशव के पास धीरे-धीरे निद्रा आ रही है। नदी वेगपूर्वक समुद्र की ओर आ रही है। हर्षित पक्षी बादलों की ओर उड़ रहा है और प्रियतम कामनापूर्वक अपने प्रियतम की सेवा के लिए प्रस्तुत हो रहा है॥ 25॥
‘At the beginning of this four-month period, sleep is slowly approaching Lord Keshav. The river is rapidly approaching the sea. The joyous bird is flying towards the clouds and the beloved is presenting herself to serve her beloved with a desire.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥