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ramayan 4.28.15: पृथ्वी की धूल बैठ गई है। वायु अब शीतल हो गई है। गर्मी का प्रकोप रुक गया है। राजाओं के युद्ध अभियान रुक गए हैं और विदेशी अपने-अपने देशों को लौट रहे हैं॥15॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.28.15 
रज: प्रशान्तं सहिमोऽद्य वायु-
र्निदाघदोषप्रसरा: प्रशान्ता:।
स्थिता हि यात्रा वसुधाधिपानां
प्रवासिनो यान्ति नरा: स्वदेशान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी की धूल बैठ गई है। वायु अब शीतल हो गई है। गर्मी का प्रकोप रुक गया है। राजाओं के युद्ध अभियान रुक गए हैं और विदेशी अपने-अपने देशों को लौट रहे हैं॥15॥
 
‘The dust of the earth has settled down. The air has become cool now. The spread of the ill-effects of heat has stopped. The war campaigns of the kings have stopped and the foreigners are returning to their respective countries.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)