Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.28.13: जो दिशाएँ बादलों से ढकी हुई हैं, जिनमें ग्रह, तारे और चन्द्रमा अदृश्य हो गए हैं, जो प्रायः नष्ट हो गई हैं, तथा जिनमें पूर्व और पश्चिम का विवेक लुप्त हो गया है, वे उन प्रेमास्पद पुरुषों के लिए कल्याणकारी प्रतीत होती हैं, जो अपने प्रियतम के साथ रहने का सुख प्राप्त करते हैं॥13॥ | ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो दिशाएँ बादलों से ढकी हुई हैं, जिनमें ग्रह, तारे और चन्द्रमा अदृश्य हो गए हैं, जो प्रायः नष्ट हो गई हैं, तथा जिनमें पूर्व और पश्चिम का विवेक लुप्त हो गया है, वे उन प्रेमास्पद पुरुषों के लिए कल्याणकारी प्रतीत होती हैं, जो अपने प्रियतम के साथ रहने का सुख प्राप्त करते हैं॥13॥
The directions which are covered by clouds and in which the planets, stars and the moon have become invisible, and which have become almost destroyed, and in which the discrimination of east and west has vanished, appear to be beneficial to those passionate people who have the pleasure of being in the company of their beloved.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥