Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.28.12: यह बिजली नीले बादल का आश्रय लेकर चमकती हुई मुझे रावण के चंगुल में जूझती हुई तपस्वी सीता के समान प्रतीत हो रही है॥12॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.28.12 
नीलमेघाश्रिता विद्युत् स्फुरन्ती प्रतिभाति मे।
स्फुरन्ती रावणस्याङ्के वैदेहीव तपस्विनी॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह बिजली नीले बादल का आश्रय लेकर चमकती हुई मुझे रावण के चंगुल में जूझती हुई तपस्वी सीता के समान प्रतीत हो रही है॥12॥
 
This lightning, taking shelter of the blue cloud and appearing bright, appears to me like the ascetic Sita struggling in the clutches of Ravana.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)