Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.28.10: ये वायु से भरी हुई गुफाओं (या हृदयों) वाले पर्वत, मेघरूपी काले मृगचर्म और वर्षारूपी जनेऊ धारण किए हुए, ब्रह्मचारियों के समान वेदों का अध्ययन आरम्भ करते प्रतीत होते हैं। 10॥   |   ramayan सर्ग 4.28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.28.10 
मेघकृष्णाजिनधरा धारायज्ञोपवीतिन:।
मारुतापूरितगुहा: प्राधीता इव पर्वता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ये वायु से भरी हुई गुफाओं (या हृदयों) वाले पर्वत, मेघरूपी काले मृगचर्म और वर्षारूपी जनेऊ धारण किए हुए, ब्रह्मचारियों के समान वेदों का अध्ययन आरम्भ करते प्रतीत होते हैं। 10॥
 
These mountains with caves (or hearts) filled with air, wearing black deerskin in the form of clouds and sacred thread in the form of streams of rain, seem to be starting the study of Vedas like celibates. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)