श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  4.27.8-9 
नानाधातुसमाकीर्णं नदीदर्दुरसंयुतम्॥ ८॥
विविधैर्वृक्षषण्डैश्च चारुचित्रलतायुतम्।
नानाविहगसंघुष्टं मयूरवरनादितम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यहाँ नाना प्रकार की धातुओं की खानें हैं। पास ही एक नदी बहती है। उसमें रहने वाले मेंढक भी उछलते-कूदते यहाँ आते हैं। नाना प्रकार के वृक्ष इसकी शोभा बढ़ाते हैं। यह चट्टानी शिखर सुन्दर और विचित्र लताओं से हरा-भरा दिखाई देता है। यहाँ नाना प्रकार के पक्षी चहचहा रहे हैं और सुन्दर मोरों की मधुर ध्वनि गूँज रही है। 8-9।
 
‘Here are mines of various types of metals. A river flows nearby. The frogs living in it also come hopping and hopping here. Various types of trees enhance its beauty. This rock peak appears green with beautiful and strange creepers. Various types of birds are chirping here and the sweet voice of beautiful peacocks is echoing. 8-9.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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