श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  4.27.7-8h 
गिरिशृङ्गमिदं रम्यमुत्तमं पार्थिवात्मज॥ ७॥
श्वेताभि: कृष्णताम्राभि: शिलाभिरुपशोभितम्।
 
 
अनुवाद
राजकुमार! पहाड़ की यह चोटी बहुत सुंदर और मनमोहक है। सफ़ेद, काले और लाल रंग की हर तरह की चट्टानें इसकी शोभा बढ़ा रही हैं।
 
‘Prince! This peak of the mountain is very beautiful and lovely. White, black and red rocks of all kinds are enhancing its beauty. 7 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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