Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.27.48: ‘अपने क्रोध को वश में रखो और शरद ऋतु की प्रतीक्षा करो। चारों वर्षा ऋतुओं में सब कष्ट सहन करो और शत्रुओं का संहार करने में समर्थ होते हुए भी इस वर्षा ऋतु में मेरे साथ इस सिंहों से सेवित पर्वत पर निवास करो।’॥48॥ | ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘अपने क्रोध को वश में रखो और शरद ऋतु की प्रतीक्षा करो। चारों वर्षा ऋतुओं में सब कष्ट सहन करो और शत्रुओं का संहार करने में समर्थ होते हुए भी इस वर्षा ऋतु में मेरे साथ इस सिंहों से सेवित पर्वत पर निवास करो।’॥48॥
‘Keep your anger under control and wait for the autumn season. Bear all the hardships during the four rainy months and despite being capable of killing enemies, spend this rainy season and live with me on this mountain served by the lions.’॥ 48॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तविंश: सर्ग:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें सत्ताईसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥