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ramayan 4.27.43: 'देखो, मैंने वह सारा शोक त्याग दिया है जो सारे कामों को बिगाड़ देता है। अब मैं वीरता के प्रचण्ड तेज को प्रोत्साहित (बढ़ाता) हूँ॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.43 
एष शोक: परित्यक्त: सर्वकार्यावसादक:।
विक्रमेष्वप्रतिहतं तेज: प्रोत्साहयाम्यहम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'देखो, मैंने वह सारा शोक त्याग दिया है जो सारे कामों को बिगाड़ देता है। अब मैं वीरता के प्रचण्ड तेज को प्रोत्साहित (बढ़ाता) हूँ॥ 43॥
 
‘Behold, I have given up all the sorrow which spoils all the work. Now I encourage (enhance) the fierce brilliance of valour.॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)