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ramayan 4.27.38: ककुत्स्थ! आप समुद्र, वन और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को उलट-पुलट कर सकते हैं; फिर उस रावण को मारना आपके लिए कौन-सी बड़ी बात है?॥ 38॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.38 
पृथिवीमपि काकुत्स्थ ससागरवनाचलाम्।
परिवर्तयितुं शक्त: किं पुनस्तं हि रावणम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थ! आप समुद्र, वन और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी को उलट-पुलट कर सकते हैं; फिर उस रावण को मारना आपके लिए कौन-सी बड़ी बात है?॥ 38॥
 
Kakutstha! You can turn the whole earth upside down including the oceans, forests and mountains; then what is a big deal for you to kill that Ravana?॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)