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ramayan 4.27.25: शत्रुसूदन सुमित्राकुमार! यह स्थान अत्यंत सुंदर और अद्भुत है। हम यहाँ खूब आनंद लेंगे। अतः यहीं रहना अच्छा रहेगा॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.25 
अहो सुरमणीयोऽयं देश: शत्रुनिषूदन।
दृढं रंस्याव सौमित्रे साध्वत्र निवसावहे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन सुमित्राकुमार! यह स्थान अत्यंत सुंदर और अद्भुत है। हम यहाँ खूब आनंद लेंगे। अतः यहीं रहना अच्छा रहेगा॥ 25॥
 
Shatrusudan Sumitrakumar! This place is very beautiful and wonderful. We will enjoy a lot here. Therefore, it will be good to stay here.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)