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ramayan 4.27.17: चन्दन, तिलक, साल, तमाल, अतिमुक्तक, पद्मक, सरला और शोक आदि नाना प्रकार के वृक्षों से युक्त वह नदी कितनी सुन्दर है?॥17॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.17 
चन्दनैस्तिलकै: सालैस्तमालैरतिमुक्तकै:।
पद्मकै: सरलैश्चैव अशोकैश्चैव शोभिताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
चन्दन, तिलक, साल, तमाल, अतिमुक्तक, पद्मक, सरला और शोक आदि नाना प्रकार के वृक्षों से युक्त वह नदी कितनी सुन्दर है?॥17॥
 
‘How beautiful is that river with its various trees like sandalwood, tilak, sal, tamala, atimuktaka, padmaka, sarala and shok?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)