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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.27.13 
गुहाद्वारे च सौमित्रे शिला समतला शिवा।
कृष्णा चैवायता चैव भिन्नाञ्जनचयोपमा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'सुमित्रनन्दन! इस गुफा के द्वार पर एक समतल शिला है, जिस पर बैठना सुखदायक है, क्योंकि वह बाहर बैठने के लिए सुविधाजनक है। वह लम्बी और चौड़ी होने के साथ-साथ खदान से निकाले गए कोयले के समान काली भी है।॥13॥
 
‘Sumitra Nandan! There is a flat rock at the entrance of this cave, which is comfortable to sit on as it is convenient to sit outside. Besides being long and wide, it is black like the coal extracted from the mine.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)