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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  4.26.9-10h 
चतुर्दश समा: सौम्य ग्रामं वा यदि वा पुरम्॥ ९॥
न प्रवेक्ष्यामि हनुमन् पितुर्निर्देशपालक:।
 
 
अनुवाद
हनुमान्! हे भद्र! मैं अपने पिता की आज्ञा का पालन कर रहा हूँ, इसलिए चौदह वर्ष पूरे होने तक किसी भी गाँव या नगर में प्रवेश नहीं करूँगा॥9 1/2॥
 
Hanuman! Gentle one! I am following my father's orders, therefore I will not enter any village or city until the completion of fourteen years.॥ 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)