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ramayan 4.26.30: मन्त्रज्ञों ने वेदी पर अग्नि स्थापित की, उसे प्रज्वलित किया और वेदी के चारों ओर पुष्प बिछाए। फिर अग्नि-संस्कार करके मन्त्र-पूत हविष्य से प्रज्वलित अग्नि में आहुति दी। 30॥   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.26.30 
तत: कुशपरिस्तीर्णं समिद्धं जातवेदसम्।
मन्त्रपूतेन हविषा हुत्वा मन्त्रविदो जना:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
मन्त्रज्ञों ने वेदी पर अग्नि स्थापित की, उसे प्रज्वलित किया और वेदी के चारों ओर पुष्प बिछाए। फिर अग्नि-संस्कार करके मन्त्र-पूत हविष्य से प्रज्वलित अग्नि में आहुति दी। 30॥
 
The mantra experts set up a fire on the altar, lit it and spread flowers around the altar. Then after performing the rites of fire, he offered the sacrifice in the fire lit by the mantra-poot Havishya. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)