Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.26.3: तत्पश्चात, सुवर्णमय मेरु पर्वत के समान सुन्दर और विशाल शरीर वाले, जिनका मुख अरुण के तेज से प्रातःकाल के सूर्य के समान चमक रहा था, वायुपुत्र हनुमान्जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा - 3॥ | ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात, सुवर्णमय मेरु पर्वत के समान सुन्दर और विशाल शरीर वाले, जिनका मुख अरुण के तेज से प्रातःकाल के सूर्य के समान चमक रहा था, वायुपुत्र हनुमान्जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा - 3॥
After that, Hanumanji, the son of Vayu, with a body as beautiful and huge as the golden Mount Meru, whose face was shining like the morning sun with the radiance of Arun, folded both his hands and said - 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥