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ramayan 4.26.23-28: सबसे पहले वे सभी लोग उनके लिए सोने से विभूषित एक श्वेत छत्र, सोने के हत्थों वाले दो श्वेत पंखे, सभी प्रकार के बहुमूल्य रत्न, बीज और औषधियाँ, दूध देने वाले वृक्षों की लटकती हुई जटाएँ, श्वेत पुष्प, श्वेत वस्त्र, श्वेत मलहम, जल और स्थल में पाए जाने वाले सुगन्धित पुष्पों की मालाएँ, दिव्य चंदन, अनेक प्रकार के सुगन्धित पदार्थ, साबुत अनाज, स्वर्ण, प्रियंगु (कागनी), मधु, घी, दही, व्याघ्रचर्म, सुन्दर और बहुमूल्य जूते, इत्र, गोरोचन और मैनसिल आदि लेकर वहाँ आये। उनके साथ सोलह सुन्दर कन्याएँ भी हर्ष में भरकर सुग्रीव के पास आईं।   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 23-28
 
 
श्लोक  4.26.23-28 
तस्य पाण्डुरमाजह्रुश्छत्रं हेमपरिष्कृतम्॥ २३॥
शुक्ले च वालव्यजने हेमदण्डे यशस्करे।
तथा रत्नानि सर्वाणि सर्वबीजौषधानि च॥ २४॥
सक्षीराणां च वृक्षाणां प्ररोहान् कुसुमानि च।
शुक्लानि चैव वस्त्राणि श्वेतं चैवानुलेपनम्॥ २५॥
सुगन्धीनि च माल्यानि स्थलजान्यम्बुजानि च।
चन्दनानि च दिव्यानि गन्धांश्च विविधान् बहून्॥ २६॥
अक्षतं जातरूपं च प्रियङ्गुं मधुसर्पिषी।
दधि चर्म च वैयाघ्रं परार्घ्यौ चाप्युपानहौ॥ २७॥
समालम्भनमादाय गोरोचनमन:शिलाम्।
आजग्मुस्तत्र मुदिता वरा: कन्याश्च षोडश॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले वे सभी लोग उनके लिए सोने से विभूषित एक श्वेत छत्र, सोने के हत्थों वाले दो श्वेत पंखे, सभी प्रकार के बहुमूल्य रत्न, बीज और औषधियाँ, दूध देने वाले वृक्षों की लटकती हुई जटाएँ, श्वेत पुष्प, श्वेत वस्त्र, श्वेत मलहम, जल और स्थल में पाए जाने वाले सुगन्धित पुष्पों की मालाएँ, दिव्य चंदन, अनेक प्रकार के सुगन्धित पदार्थ, साबुत अनाज, स्वर्ण, प्रियंगु (कागनी), मधु, घी, दही, व्याघ्रचर्म, सुन्दर और बहुमूल्य जूते, इत्र, गोरोचन और मैनसिल आदि लेकर वहाँ आये। उनके साथ सोलह सुन्दर कन्याएँ भी हर्ष में भरकर सुग्रीव के पास आईं।
 
First of all, all of them came there carrying for him a white umbrella decorated with gold, two white fans with golden handles, all kinds of precious stones, seeds and medicines, the hanging dreadlocks of milk-yielding trees, white flowers, white clothes, white ointments, garlands of fragrant flowers found in water and land, divine sandalwood, many kinds of fragrant substances, whole grains, gold, Priyangu (Kagani), honey, ghee, curd, tiger skin, beautiful and costly shoes, perfume, gorochana and mansil etc. Along with them, sixteen beautiful girls also came to Sugreeva, filled with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)