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ramayan 4.26.22-23h: जब वानरों में श्रेष्ठ सुग्रीव महान पराक्रम दिखाते हुए अन्तःकक्ष में आये, तब उनके मित्रों ने उनका उसी प्रकार अभिषेक किया, जैसे देवताओं ने सहस्त्र नेत्रों वाले इन्द्र का किया था।   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  4.26.22-23h 
प्रविष्टं भीमविक्रान्तं सुग्रीवं वानरर्षभम्॥ २२॥
अभ्यषिञ्चन्त सुहृद: सहस्राक्षमिवामरा:।
 
 
अनुवाद
जब वानरों में श्रेष्ठ सुग्रीव महान पराक्रम दिखाते हुए अन्तःकक्ष में आये, तब उनके मित्रों ने उनका उसी प्रकार अभिषेक किया, जैसे देवताओं ने सहस्त्र नेत्रों वाले इन्द्र का किया था।
 
When Sugreeva, the best of the monkeys, displaying tremendous valour, came to the inner chamber, his friends anointed him in the same manner as the gods had anointed the thousand-eyed Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)