Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.26.17-18h: सखे! कार्तिक मास आने पर तुम रावण का वध करने का प्रयत्न करो। यही हमारा निश्चय रहा। अब तुम अपने महल में प्रवेश करो और राज्याभिषेक करके अपने मित्रों को प्रसन्न करो। 17 1/2॥ | ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कार्तिके समनुप्राप्ते त्वं रावणवधे यत।
एष न: समय: सौम्य प्रविश त्वं स्वमालयम्॥ १७॥
अभिषिञ्चस्व राज्ये च सुहृद: सम्प्रहर्षय।
अनुवाद
सखे! कार्तिक मास आने पर तुम रावण का वध करने का प्रयत्न करो। यही हमारा निश्चय रहा। अब तुम अपने महल में प्रवेश करो और राज्याभिषेक करके अपने मित्रों को प्रसन्न करो। 17 1/2॥
Sakhe! When Kartik arrives, you should try to kill Ravana. This remained our determination. Now you enter your palace and after being anointed to the kingdom, make your friends happy. 17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥