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ramayan 4.26.16: हे सुग्रीव! यह पर्वत गुफा अत्यंत सुंदर और विशाल है। इसमें आवश्यकतानुसार पर्याप्त वायु है। यहाँ पर्याप्त जल उपलब्ध है और कमल तथा कुमुदिनी भी बहुत हैं॥16॥   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.26.16 
इयं गिरिगुहा रम्या विशाला युक्तमारुता।
प्रभूतसलिला सौम्य प्रभूतकमलोत्पला॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे सुग्रीव! यह पर्वत गुफा अत्यंत सुंदर और विशाल है। इसमें आवश्यकतानुसार पर्याप्त वायु है। यहाँ पर्याप्त जल उपलब्ध है और कमल तथा कुमुदिनी भी बहुत हैं॥16॥
 
Gentle Sugreeva! This mountain cave is very beautiful and huge. It has sufficient air as per requirement. There is sufficient water available here and there are many lotus and water lilies too.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)