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ramayan 4.26.15: सौम्य! यह किसी पर आक्रमण करने का समय नहीं है। अतः तुम अपने सुंदर नगर में जाओ। मैं लक्ष्मण के साथ इसी पर्वत पर रहूँगा। 15.   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.26.15 
नायमुद्योगसमय: प्रविश त्वं पुरीं शुभाम्।
अस्मिन् वत्स्याम्यहं सौम्य पर्वते सहलक्ष्मण:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! यह किसी पर आक्रमण करने का समय नहीं है। अतः तुम अपने सुंदर नगर में जाओ। मैं लक्ष्मण के साथ इसी पर्वत पर रहूँगा। 15.
 
Soumya! This is not the time to attack anyone. So you go to your beautiful city. I will stay on this mountain with Lakshman. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)