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ramayan 4.26.13: वह आपके बड़े भाई का ज्येष्ठ पुत्र है। पराक्रम में उसके समान ही है और उदार हृदय वाला है। अतः अंगद युवराज पद पाने का सर्वथा अधिकारी है॥13॥   |   ramayan सर्ग 4.26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.26.13 
ज्येष्ठस्य हि सुतो ज्येष्ठ: सदृशो विक्रमेण च।
अङ्गदोऽयमदीनात्मा यौवराज्यस्य भाजनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह आपके बड़े भाई का ज्येष्ठ पुत्र है। पराक्रम में उसके समान ही है और उदार हृदय वाला है। अतः अंगद युवराज पद पाने का सर्वथा अधिकारी है॥13॥
 
‘He is the eldest son of your elder brother. He is equal to him in valour and has a generous heart. Therefore, Angad is absolutely entitled to be crowned as the crown prince.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)