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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 26: हनुमान जी का सुग्रीव के अभिषेक के लिये श्रीरामचन्द्रजी से किष्किन्धा में पधारने की प्रार्थना, तत्पश्चात् सुग्रीव और अङ्गद का अभिषेक  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  4.26.1-2 
तत: शोकाभिसंतप्तं सुग्रीवं क्लिन्नवाससम्।
शाखामृगमहामात्रा: परिवार्योपतस्थिरे॥ १॥
अभिगम्य महाबाहुं राममक्लिष्टकारिणम्।
स्थिता: प्राञ्जलय: सर्वे पितामहमिवर्षय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, वानर सेना के प्रमुख योद्धा (हनुमान आदि) गीले वस्त्रों से शोकाकुल सुग्रीव को चारों ओर से घेरकर उसके साथ अनायास ही महान कर्म करने वाले महाबाहु श्री राम की सेवा में आ गए। श्री राम के पास आकर वे सभी वानर उनके सामने हाथ जोड़कर ऐसे खड़े हो गए, जैसे बड़े-बड़े ऋषि ब्रह्माजी के सामने खड़े होते हैं।
 
Thereafter, the chief warriors of the monkey army (Hanuman etc.) surrounded the grief-stricken Sugreeva with wet clothes from all sides and along with him came to serve the mighty-armed Shri Ram, who performed great deeds without any effort. Coming to Shri Ram, all those monkeys stood before him with folded hands, just as the great sages stand before Brahmaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)