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ramayan 4.25.53: दुःखी हुए सुग्रीव के साथ-साथ समान रूप से दुःखी और शोकाकुल हुए पराक्रमी श्री रामजी ने भी सम्पूर्ण भूत-क्रियाएँ सम्पन्न करवाईं ॥ 53॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.25.53 
सुग्रीवेणैव दीनेन दीनो भूत्वा महाबल:।
समानशोक: काकुत्स्थ: प्रेतकार्याण्यकारयत्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
दुःखी हुए सुग्रीव के साथ-साथ समान रूप से दुःखी और शोकाकुल हुए पराक्रमी श्री रामजी ने भी सम्पूर्ण भूत-क्रियाएँ सम्पन्न करवाईं ॥ 53॥
 
Along with Sugreeva who was saddened, the mighty Sri Rama, equally saddened and grief-stricken, got all the ghostly rituals done. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)