श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  4.25.40-41 
हा वानरमहाराज हा नाथ मम वत्सल॥ ४०॥
हा महार्ह महाबाहो हा मम प्रिय पश्य माम्।
जनं न पश्यसीमं त्वं कस्माच्छोकाभिपीडितम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों के राजा! हे मेरे दयालु प्राणनाथ! हे परम पूज्य महाबाहु वीर! हे मेरे प्रियतम! एक बार मेरी ओर तो देखो। इस शोकग्रस्त दासी की ओर क्यों नहीं देखते?॥40-41॥
 
Oh King of the monkeys! Oh my kind Pranaath! Oh the most revered Mahabahu Veer! Oh my dearest! Look at me once. Why don't you look at this grief stricken maid?॥ 40-41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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