श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  4.25.38-39h 
अवरोप्य तत: स्कन्धाच्छिबिकां वानरोत्तमा:॥ ३८॥
तस्थुरेकान्तमाश्रित्य सर्वे शोकपरायणा:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात पालकी उठाने वाले श्रेष्ठ वानरों ने उसे अपने कंधों से उतार लिया और वे सब शोक करते हुए एकांत स्थान पर बैठ गए ॥38 1/2॥
 
Thereafter, the best monkeys carrying the palanquin took it down from their shoulders and they all sat in a lonely place in grief. 38 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas