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ramayan 4.25.37-38h: जल से घिरी हुई पर्वतीय नदी तुंगभद्रा के एकांत तट पर पहुँचकर बहुत से वनवासी वानरों ने चिता तैयार की।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  4.25.37-38h 
पुलिने गिरिनद्यास्तु विविक्ते जलसंवृते॥ ३७॥
चितां चक्रु: सुबहवो वानरा वनचारिण:।
 
 
अनुवाद
जल से घिरी हुई पर्वतीय नदी तुंगभद्रा के एकांत तट पर पहुँचकर बहुत से वनवासी वानरों ने चिता तैयार की।
 
Reaching the secluded bank of the mountain river Tungabhadra, which was surrounded by water, a large number of forest-dwelling monkeys prepared a funeral pyre. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)