श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  4.25.34-35h 
तत: प्रणिहिता: सर्वा वानर्योऽस्य वशानुगा:॥ ३४॥
चुक्रुशुर्वीरवीरेति भूय: क्रोशन्ति ता: प्रियम्।
 
 
अनुवाद
उसके अधीन सभी वानर-पत्नियाँ पास आकर रोने और चीखने लगीं तथा बार-बार अपने प्रियतम को पुकारते हुए कहने लगीं, 'हे वीर, हाँ वीर!'
 
All the monkey-wives under his control came near and started crying and screaming repeatedly, calling out to their beloved, saying, 'Oh brave, yes brave!'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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